साल की इस सुंदर बेला का अंतिम प्रणाम आज होगी इस वर्ष की सुंदर आखिरी शाम साल की इस सुंदर बेला का अंतिम प्रणाम आज होगी इस वर्ष की सुंदर आखिरी शाम
माँ की अन्तिम मुस्कान माँ की अन्तिम मुस्कान
प्रेम थका मांदा अब पस्त हो चुका है राह तुम्हारी देखते देखते। प्रेम थका मांदा अब पस्त हो चुका है राह तुम्हारी देखते देखते।
हरगोविंद जाग अब, कर अब ही तू जो नहीं कर पाया.....! हरगोविंद जाग अब, कर अब ही तू जो नहीं कर पाया.....!
इस कविता में मैंने "प्रेम" को कुछ पंक्तियों द्वारा दर्शाया है | इस कविता में मैंने "प्रेम" को कुछ पंक्तियों द्वारा दर्शाया है |